• kavish_kumar 9w

    हर शाम जेहन में तेरी बात आती है..
    गेसुओं में लगे मोगरे की महकती सौगात लाती है..
    सोयी चांदनी बगल में मेरे, कभी उजले रूप की..
    जब जब रोती अमावस होती है, तेरी याद आती है..
    सर्दी के ठंडे मन की, उजली धूप है तेरे जज्बात..
    तेरे हर उलझी जुल्फ, सुलझे महकते गीत गाती है..
    मैं खोया कभी तन्हाइयों के भंवर में ..
    तू ही मल्लाह बनकर, मुझे किनारे पर खीच लाती है..
    हर शाम मेरे जेहन में, तुम्हारी बात आती है..
    मेरे दिल में हमेशा, हसरतों के फूल खिलाती है..
    ©Aatish ��