• amuquotes 14w

    तन्ह़ा सफ़र

    कब तक यूँ डूबा रहूँगा
    इस ग़म के दरिया में
    कश्ती लिए तेरी यादों की सफर पर तन्हा अकेला
    ना मंज़िल का कोई अता पता है
    ना ही साहिल नज़र आता है
    हर तरफ अंधेरा है कुछ समझ नहीं आता है
    तेरे खयालों में खोकर मुझे आफ़ताब नज़र आता है
    ज़िन्दगी भी साथ छोड़ देती है कभी कभी
    कोई उम्मीद है जो यहां तक लायी है
    नीचे दरिया है ऊपर बादल ग़म के
    तड़कटे हैं भड़कते हैं
    गरजते हैं बरसते हैं
    तो कभी तूफानों से गुज़रता हूँ
    कभी लेहरे तेज़ होती हैं
    तो कभी हवाएँ
    डूबता,उछलता, गिरता, पड़ता,
    यूँ ही बस चल रहा हूँ
    अब तो लगता है ये कश्ती भी मेरा साथ छोड़ देगी
    ये ज़िन्दगी भी मेरा हाथ छोड़ देगी..
    ©amuquotes