• preeti_ 2w

    वो रोज़ कहता है कि उसे मुझसे मोहब्बत है
    मुस्कुराती हूँ मैं भी, पर कुछ कह नहीं सकती।

    यूँ तो कहती हूँ हर बार के तुम बस मेरे ही हो
    पर ये भी सच है मैं उसकी हो नहीं सकती।

    हां देखी है मैने नम आँखें तेरी, समझती हूँ,
    पर कुछ बात है कि मैं रो नहीं सकती ।

    माना तेरी चाह हूँ और मुझे नाज़ है इसपे
    पर जैसा तू चाहता है मैं वैसी हो नहीं सकती।

    क्या कुछ न पढ़ा है मैने तेरी आँखों में
    पर तेरे जैसी खुली किताब मैं हो नहीं सकती।

    तू है तो मैं हूँ, तू जो है तो मैं हूँ
    पर तमाम उम्र तेरे ख्यालातों में मैं खो नहीं सकती।

    हां, मुनासिब है कि अब राह जुदा कर लें हम अपनी
    पर जो रूह एक है, साँसें जुदा हो नहीं सकती।

    जानती हूँ मैं कि बहुत ऊपर हूँ मैं तुम्हारे लिए
    पर ऐ हमख्याल, इंसान हूँ मैं, खुदा हो नहीं सकती।




    ©preeti_ & ©princewrites