• _sunny 14w

    मेरी रूह की दहलीज़ पर तेरे लब़ क्या छू गये..
    मैं मयख़ाना बन बैठा..
    ..

    तेरे जिस्म को अपनी सीरत में ढाल क्या लिया
    मैं शिवाला बन बैठा..
    ..

    बन बैठा मेरा माज़ी तेरी ही तसवीर सा आईना
    दिल दिवाना बन बैठा..
    ..

    इज़हार ए इशक ना करता तो भी चल ही जाता
    स्याही को कागज़ से मिलाया
    इक अफ़साना बन बैठा..
    ..

    मैं मयख़ाना बन बैठा..
    ©sunnY