• devesh_mishra 14w

    Ego

    बचपन में इमारतें देखकर अचंभित होता था मैं,
    आज भी उन इमारतों में बैठे लोगों को देखकर हैरत होती है
    उन्हीं लोगों में बैठा अपने आप को अलग समझता हूं मैं,
    गुरूर है अपने "मै" पर मेरा, लेकिन ये सोचा नहीं,
    आज भी बचपन की किसी आंखों में बस एक इमारत ही हूं मै
    ©soul_rebellion