• suraj_singh_sijwali 14w

    # मेरी_माँ

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    मुट्ठी बाँधे रोते रोते जब इस दुनिया में आया था
    तब कोना तेरे आँचल का माँ कितना मन को भाया था
    बस एक वो इकलौता दिन था जीवन में
    मेरी चितकारी पर माँ जब तूने जश्न मनाया था।
    हृदय पटल पर अँकित है माँ बचपन की वो बातें सारी
    तेरी लोरी सुन सो जाता में,बिना नींद की रातें तेरी।
    वो मुझको नहलाना तेरा,ज़ोर ज़ोर से गाना तेरा
    वो काजल का टीका तेरा,जो तूने बाँधी चोटी मेरी
    फिर थोड़ा सा बड़ा हुआ जब,कोई प्यार ना जतलाता
    डाँट डपट करते थे पापा,एक तेरा प्यार मैं पाता
    स्कूल ना जाने की ज़िद में मानो इन्कलाब ले आया था
    फिर तेरी मान मुनव्वर से ही पहले दिन रह पाया था।
    जब सर्द ज़माने में रहकर कोई भी ग़म मिलता था
    तेरे स्पर्श की गरमाहट में चेहरा कैसे खिलता था।
    मेरी हर पहचान में माँ, तेरा अक्श समाया है
    चाहे जहान फतह कर लूँ,चलना तूने सिखाया है।
    तेरी ममता की अज़मत में,मैं आज भी सबसे प्यारा हूँ
    दुनिया की परवाह नहीं,मैं तेरी आँख का तारा हूँ।

    ©suraj_singh_sijwali