• rudrii 6w

    ।।।।।

    इंसाफ की जबसे बात चली है
    कलेजों में किसी के आग लगी है

    इरादों में, उसूलों में अटल नहीं अपने
    जवानी बेकार हो चली है

    निकलता नहीं तीर धनुष पर चढ़ा हुआ
    नियत अर्जुन की बदल चली है

    सागर की एक अना की खातिर
    नदियां वापस मुड़ चली हैं

    कैसे उदय होगा सूरज कल का
    रोशनी अंधेरे की सम्त चली है

    Röh!7