• sweety_singh 15w

    दुर्गा

    तु दुर्गा तेरे रूप हज़ार,
    लाज बचाई जब अपनो पर भयो प्रहार.

    तू सुंदर मृदुल शीतल जल - सी,
    फिर भी दे रही है परीक्षा अपने बल की.

    जब जब लगा तेरे दामन पे दाग,
    जंगल के आग-सी फैली वो बात.

    छुपा लिए उस चुनर से अपने दर्द तमाम,
    तू दुर्गा तेरे रूप हज़ार.

    उसके जन्‍म को तूने समझा तिरस्कार,
    बेटी हुई है मचा दिया दुनिया में हाहाकार.

    उम्र हुई खेलने की गुड्डो से हुआ प्यार,
    कैसे संभाले तेरा ये घर संसार.

    तेरी देहलीज़ हो या किसी और की ना कभी होगा तेरा नाम खराब,
    भले ही तूने छीने उसके तमाम ख्वाब.

    क्या इसे समझे उसके प्यार की हार
    जो बेच देते हो भरे बाज़ार

    माँ, बेटी, बहन बन करती हैं वो इतना दुलार
    क्या दे नहीं सकते हम उसे वो इज्ज़त वो सम्मान
    ©sweety_singh