• abhishekjha 33w

    उभरो।

    उभरो, चमको, चहको
    गाओ, झूमो, महको,
    पियो, पिलाओ, बहको
    बैठो, सोचो खुद को।

    गिर जाओ एक दिन,
    सूख कर
    उड़ जाओ,
    भटको
    आँधियों में कहीं
    बह जाओ
    बारिशों में
    भीगो।

    पूछने पर,
    पता न लगो
    नाम न हो
    किताबों में
    गीतों में
    न गाया जाए
    कोई दाम न रहे
    हिसाबों में
    बिसरो

    बैठो, देखो,
    नभ को
    मुँह खोल कर सोखो
    रूखी धूप,
    दिन को
    अकड़ो,
    कुछ और कड़को

    ठहरो,
    सो जाओ
    किसी गुमनाम बस्ती में
    खोजो,
    जाड़े के अलाव
    झुलसो,
    ख़ाक हो जाओ।

    पत्तों
    तुम तो हम जैसे हो
    किसी पुरानी हुई शाख पर
    किसी थकी हुई कोख पर
    आओ
    उभरो।



    ©abhishekjha