• priyanshu93 6w

    मिटटी के ढेर

    ढेर ' मिटटी का बोझा ' ( शरीर - Body ) लिए जीते हैं
    रखकर के कागज मिटटी पर घमंड उसका करके जीते हैं
    देख बनाने वाले कितने अजीब हैं तेरे मिटटी के ढेर
    खुद तो हैं मिटटी और लेकर के सहारा लकड़ी का जीते हैं
    मोहब्बत भुलाकर के आगे डर के कितना इतराकर कर इठला का जीते हैं
    घुल जाना है मिटटी मैं ही एक दिन जानते हैं फिर भी यहाँ लेकर के जान एकदूसरे की जीते हैं

    मिटटी का बोझा लिए देख बनाने वाले तेरे इंसान किस तरह जीते हैं
    इंसान को न समझकर के इंसान इस कदर जीते हैं
    कोई मोहब्बत अपनी तनहा कर चला महफ़िलों मैं
    कोई रुस्वा कर चला किसी को तनहाईयों मैं
    मिटटी के ढेर ही हैं ये
    फिर भी इस कदर पल 2 दूसरे को तोड़ने की आस मैं फिरते हैं ।

    मिटटी के ढेर मिटटी में मिल जाने हैं
    फिर पहचान और बता मुझको वो कौन है जिसको ये कागजों के ढेर साथ ले जाने हैं ।

    ©priyanshu93