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    उस रात जैसे फिर कोई टीस उठी और अचानक मेरी नींद टूट गई। दिसंबर की सर्द रात में भी पसीने से तर बदर मैं कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा।
    " कोई बुरा सपना देखा होगा शायद", खुद को यह बोलकर मैं फिर से नींद की आगोश में जाने को तैयार ही बैठा था कि कुछ अजीब सी आवाज सुनाई दी। इस मरतबा डर कुछ बढ़ गया था। कुछ हिम्मत जुटाते हुए मैंने जानने की कोशिश की। पर्दा हटाया तो वहां कुछ न था। "क्या हो सकता है आखिर?", मन ही मन सोचा। प्यास भी लगा रही थी तो मैं रसोई की तरफ बढ़ा। पानी पीकर जैसे ही लौटा तो जो देखा, उसे देखकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई । बिस्तर पर मेरे जैसा ही दिखने वाला कोई शख्स सो रहा था। कुछ देर बाद समझ में आया कि मैं ये दुनिया छोड़ किसी दूसरी दुनिया में जा चुका था।

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