• viyanshnaraniya_ 2w

    सर्द रात

    सर्द रात में सोना भी एक कला है जनाब,
    कैसे बेंच पे लेटना है
    कैसे जाड़े से बचने के लिए बदन पे गत्ते लपेटने है
    कैसे रूह जम सी जाती है
    जब साथ में सोए एक हमराही की सुबह लाश मिल जाती है
    कैसे जलते अलाव में हाथ आने वाली हर चीज़ की आहुति दे दी जाती है
    अरे रजाई , कम्बल तो क्या यहाँ शॉल भी मय्यसर नहीं हो पाती
    कैसे ठिठुरते हुए अपनो को देख दिल सहम उठता है
    कहीं से तो गर्मी का आसरा मिल जाए ऐसा मन करता है
    कैसे डर का पारा बढ़ता है जैसे जैसे मौसम का पारा घटता है
    कैसे नेकी की दीवार को देख के दिल को सुकून मिलता है
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    हमारी सर्द रात का गुजारा तो ऐसे ही होता है
    और हां जनाब,
    अगर आप को अभी भी लगता हैं कि सर्द रात में सोना एक 'कला' नहीं है
    तो बेशक़ बिताइए एक रात हमारे साथ।

    ©viyanshnaraniya_