• likhaavat 5w

    आज एक सच सुनाता हूँ, ज़िन्दगी का सच

    ज़िंदगी में ऐसे बोहोत लोग मिलेंगे जिन्हे तुम्हारी ज़रूरत होगी, पर फिक्र तुम्हारी कुछ ही लोग करेंगे.

    गलत मत समझना पर ज़रूरत पल भर की चाहत है, एक बार ख़तम गयी तो दोबारा शायद न पनपे

    ज़रूरत तुम्हे शायद सुबह office जाते वख्त, मेट्रो में उस खाली सीट की भी हो. पर क्या तुम्हे उससे प्यार है?

    जिस पानी की ज़रूरत हमें प्यास लगने पर समझ आती है, प्यास बुझने पर दो और घूँट पीना भी मुश्किल लगता है न उसका?

    भरे हुए पेट अपनी favourite dish भी शायद अनदेखी कर दो, पर भूखे पेट जो मिल जाये वही अमृत

    ये सब ठीक है, ज़रूरत होना कोई बुरी बात नहीं.. हमें खाने की ज़रूरत है, पीने की ज़रूरत है, दोस्तों की ज़रूरत है.. पर प्यार, इसे सिर्फ अपनी ज़रूरत बना के मत रखना


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