• jignaa 6w

    प्रेम विजोगण बावरी बेचैन,
    कान्हा दिसे चहुँओर,
    फिर चाहे दिन हो या हो रैन,
    प्रेम विजोगण बावरी बेचैन।

    सुधबुध बिसरी; भान भूली,
    जैसे ही धुन बंसी की सुन ली,
    स्वप्न कृष्ण के ही देखत यह नैन,
    प्रेम विजोगण बावरी बेचैन।

    संसार का मायाजाल बुना है,
    पर भक्ति का भी मार्ग चुना है,
    राधा, मीरा या गोपी, सब खोई चैन,
    प्रेम विजोगण बावरी बेचैन।।
    pranalii