• kamalmeena 15w

    ऐ ज़िंदगी उसका सलीक़ा भी
    अब तुझ सा हो गया हैं;
    वो इत्तेफ़ाक़ से कई दफ़ा
    मिल तो जाती हैं;
    बस अब फ़र्क़ इतना सा हैं
    आँखों से आँखें नहीं मिलती।


    ©kamalmeena