• vaibhavshukla 6w

    रू-ब-रू हो के भी ना जाने क्यूँ रुकतीं नहीं हैं

    पलकें,

    उनकी उठतीं नहीं हैं हमारी झुकती नहीं हैं

    ©vaibhavshukla