• isshanisaxsena 23w

    पर मोजज़ा ही हो तुम, वो, जो, फिर भी मेरी हयात को उल्फ़त से फ़रोजा़ँ कर, ज़ियाँ की तारीकी को कर रहा है गुम।
    #सहल #नफ़स

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    हिया

    साथ उसने छोड़ा था जो,
    क़ल्ब उससे तो मुँह अभी तक मोड़ पाया नहीं हैं;
    रूह से अंजुमन टूटा था जो,
    दिल अभी तक उसे तो जोड़ पाया नहीं हैं;
    तुम्हारी रिफ़ाक़त पर ऐतबार करे भी तो कैसे,
    मन खुद पर जो फिरसे यकीन करना सीख पाया नहीं हैं।
    ©इशानी सक्सेना