• aksroohi_writeups 23w

    मुँह बनाये फिर रहे हो जो यूँ अलग से
    अलग तो पहले हो चुके हो, फिर मुँह क्यों बना रहे हो

    दिल टूटा लिए फिर रहे हो हाथों में
    दिल तो टूट गया अब घूमकर कहाँ जा रहे हो

    फूल तोड़ लिए हैं किसी के बाग से
    मेरे जनाज़े में आकर फिर फूल क्यों चढ़ा रहे हो

    अल्लाह ने चाहा तो ये होगा,वो होगा
    अल्लाह की चाहत के ख़िलाफ़ जाकर,अब अफसोस क्यों जता रहे हो

    इश्क़ करके पहले मुझसे
    अश्क़ दे दिए, अब हमदर्दी जता रहे हो

    अब तो चली गयी जान भी मेरी
    सवाल बरकरार है के तुम क्यों अब तक मेरे ख़्याल से नहीं जा रहे हो?
    ©aksroohi_writeups