• lakshmipati_ravishekh 3w

    Futil

    पढ़ि गुणि पाठक भये, समुझाये संसार
    आपन तो समुझै नहीं, बृथा गया अवतार।

    पढ़ते और विचारते विद्वान तो हो गये तथा संपूर्णसंसार को समझाने लगे
    किंतु स्वयं को कुछ भी समझ नहीं आया और उनका जन्म व्यर्थ चला गया।

    Padhi guni pathak bhaye , samujhye sansar
    Aapan to samujhaye nahi , britha gaya awatar.

    A pundit becomes a scholar reading and thinking. Though he explains his knowledge to the world, he himself does not understand anything. Birth as such a scholar is futile.

    © Kabiradas