• varish 29w

    *एक जैसी ही दिखती थी माचिस की वो तीलियाँ,*
    *कुछ ने "दीए" जलाये और कुछ ने "घर",*

    *मिली हैं रूहें तो, रस्मों की बंदिशें क्या है,*
    *यह जिस्म तो ख़ाक हो जाना है फिर रंजिशें क्या हैं,*

    *है छोटी सी ज़िन्दगी तकरारें किस लिए,*
    *रहो एक दूसरे के दिलों में यह दीवारें किस लिए,* (कॉपी)