• drajaysharma_yayaver 7w

    अंधविश्वास

    अपनी आँखों से ज्यादा जिन पर यकीन था,
    वो ही शख़्स दगाबाज़ निकला।
    जिस पर तोहमत लगाते रहे ज़माने की,
    वही अनपढ़ जांबाज़ निकला।
    अब खुद को अंधा कहूँ या अपने विश्वास को,
    सोना ही अपना खराब निकला।
    गलती बेटी की थी बदचलन, शातिर थी बड़ी,
    पीटा जिसको मुहल्ले ने बेगुनाह निकला।
    ©drajaysharma_yayaver