• shaill 3w

    कल्पना

    क्या शायद वो मेरी कल्पना है,
    या फिर एक सुहाना सपना,
    बहुत चंचल बहुत सोख है,
    ये मेरी खूबसूरती की परिकल्पना।

    एक तितली सी खूबसूरत है,
    सुबह की ओस सी शीतल,
    आँखो में खूबसूरत काजल है,
    जैसे गर्मी के बाद सावन की घटा।

    सूरज की चमक चेहरे पर है,
    झील सी गहरी आँखो के तले,
    हाँथो के कंगन की खनक है,
    जुल्फों में मदहोश फिजा की गहराई।

    माथे पे बिंदिया की चमक है,
    होंठो पर मादकता गहराई,
    रूह में मेरी उनकी महक है,
    देखो खुशियां जिंदगी में आई।
    शैल.....