• abhay_singh426 16w

    "ज़िंदगी"

    ना जाने कहाँ ये ज़िंदगी ले जाएगी,
    बस चलता जा रहा हूँ मैं,
    ना मंज़िल की खबर है,
    ना रास्ते का पता है,
    बस जीवन के इस रस में,
    ढलता जा रहा हूँ मैं,
    बातें तो बहुत होती है ज़माने में,
    मेरी खामोशी को लेकर,
    सब एक मदहोशी में सुन रहा हूँ मैं,
    दुख भरे इस संसार में,
    ना जाने कैसे,
    खुशी के दो पल चुन रहा हूँ मैं।।

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