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    #रंज-ए-फुरकत

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    रंज-ए-फुर्क़त

    सरापा जो साहिब-ए-दिल थे
    आखिर हरजाई,सँगदिल निकले

    रफ्ता रफ्ता देखी वक्त की तदबीरें
    दुश्मन सारे बेहद मुत्तासिल निकले

    नाज-ए-इश्क़ में मिटने के अपने हुनर थे
    पागल परवाने सारे भरी महफ़िल निकले

    तीरगी की रंज-ए-फुर्क़त कोई समझे
    थामे जो हाथ,वो सारे कातिल निकले

    जो हर साँस में मौत जी सके,वो इश्क़ करे
    इश्क-ए-गलियों से न कोई बुजदिल निकले

    पृथ्वी साथ देना जरूर,मुकरने के बाद उसके
    नाकामयाबी की दौड़ में,एक तो काबिल निकले


    पृथ्वी
    ©arpit_prithvi