• dr_ravilamaba 13w

    कुछ आंखों में गीलापन सा पाया
    वो फिर आँखों से याद बन कर बहने लगी
    एक दीवार बनाई थी दीवानेपन के सामने
    याद के ज़ोर से वो ढहने लगी
    कानो के आगे एक परदा डाल लिया था
    चीख़ इतनी जोर थी कि दिल की पुकार भी उन्हें कहने लगी
    सामने गया जब उनके अनदेखा कर दिया
    आदत सी हो चली थी बर्दाश्त की आत्मा मेरी इस दर्द को भी सहने लगी
    ©dr_ravilamaba