• malhotra_ji 2w

    वो लड़की..

    बातें किया करती है,
    गालिब,फराज़, गुलज़ार की,
    एक पल को गुमशुदा तो दूसरे
    पल खबर है वो अखबार की।

    बेखबर दर्द-ए-मोहब्बत से
    चल पड़ी है राह अपने यार की,
    एक पल को गुमशुदा तो दूसरे
    पल खबर है वो अखबार की।

    पंछियों से दोस्ती है,
    बैरी वो हर पिंजरे और दीवार की,
    एक पल को गुमशुदा तो दूसरे
    पल खबर है वो अखबार की।

    मिट्टी की इस दुनिया में,सोने की
    बनी मूरत अजीज वो हर सुनार की,
    एक पल को गुमशुदा तो दूसरे
    पल खबर है वो अखबार की।

    कभी वो बुलबुलों सी, तो कभी खंजर
    तेज़ धार की,
    एक पल को गुमशुदा तो दूसरे
    पल खबर है वो अखबार की।

    विराना भी उसका अपना, और रोनक
    वो हर जशन-ए-बहार की,
    एक पल को गुमशुदा तो दूसरे
    पल खबर है वो अखबार की।

    सिमटी कोमलता में नन्हीं सी कली,
    तो कभी पहरेदार वो मज़ार की,
    एक पल को गुमशुदा तो दूसरे
    पल खबर है वो अखबार की।

    @mansi