• devesh_upadhyay 5w

    ओ !! गरीबी, अशिक्षा, लाचारी और भुखमरी, कहाँ हो तुम ?
    सुन रही हो ?? तुम सब से कहना है कुछ, सुनो
    देखो इस समाज में सब के पास कुछ न कुछ है
    किसी के पास अमीरी,किसी के पास शिक्षा, तो किसी के पास भरपेट खाना
    मेरे पास ये नहीं है ये सब,
    आओ अब तुम तो साथ आओ, और कभी जाना नहीं।
    बने रहना तुम मेरे मरने तक मेरे हमसफ़र !!!

    इस रचना को पढ़ें जरूर और लोगों तक पहुँचावें ।
    @hindii द्वारा शुरू को गयी पहल के तहत मैं यह रचना मेरे जैसे गांव किसानों को समर्पित करता हूं ।
    #du #hind #kisan #wds #hindiwriters #hunetwork @monikakapur @laughing_soul @feelingsbywords @sangini_kesarwani @smriti_mukht_iiha @mohini_uvaach @monika_kakodia @pamela_bhowmick @asmakhan

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    अन्नदाता

    ओ !! मेरे धोती लाठी चरखा वाले गांधी बापू,
    तुम होंगे किसी की जेबों को मोटा करने वाले
    तुम होंगे बड़ी बड़ी तस्वीरों में जगह जगह टंगने वाले
    पर मेरे लिये तुम गांव की मिट्टी में भारत देखने वाले हो ।

    ओ !! आलीशान भवनों में मिलने वाली शिक्षा,
    तुम होगी किसी की मंहगी मोटी किताबों में मिलने वाली
    तुम होगी जगह जगह अमीरों को बेची जाने वाली,
    पर मेरे लिये तुम, मेरी संतान के संस्कारों में बसती हो ।

    ओ !! अन्तर्मन को प्रफुल्लित करने वाली खुशी,
    तुम होगी किसी की तर्जनी पे अंगूठी के साथ आने वाली
    तुम होगी किसी की पहली चौपहिया फटफटी की चाबी वाली
    पर मेरे लिये तुम बिन ओलावृष्टि की फसल में हो,
    मेरे लिये तुम शाम की थाली बेटे के साथ खाने में हो ।

    ओ !! सावन की पहली बारिश, भले ही होंगी
    तुम बहुत सी प्रेम कहानियों का एक अद्वितीय अमर किरदार,
    तुम होगी बहुतों के घर में पकोड़ों की खुशबू लाने वाली,
    पर मेरे लिये तुम मेरी माँ की खुशबू का सुखद एहसास दिलाने वाली हो,
    मेरे लिये तुम एक उम्मीद हो, जिससे मेरा घर चलेगा ।

    ©devesh_upadhyay
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