• aazadakash 2w

    ख़्वाहिश

    उनसे बात करने का अरमान हर रात जागता है
    अंजाम जानता है दिल, सो चुप बैठ जाता है

    रोज़ सारी चीज़ें तहस-नहस कर जाता है
    दिल के जहाँ में अफ़सोस का बवंडर आता है

    पलकों की दहलीज़ लाँघने की इजाज़त नही देता
    अश्क़ों को वापस बुलाने का हुनर, दिल को आता है

    मेरा इज़्तिराब भी शायद कोई नौकरी करता है
    सुबह जाता है, शाम होते ही वापस लौट आता है

    सपनों की दुनिया में न जाने कहाँ कहाँ तक जाता है
    उसका ख़याल आँखों को नींद के लिए तरसाता है

    शुक्र है! उनके घर का वो दरीचा खुला रहता है
    'आज़ाद' हवा के साथ जाकर उन्हें देख आता है


    ©aazadakash