• deepshikhagoswami 23w

    माँ

    तुझसे रोज़ लड़कर,
    तुझ हीै पर चिल्ला जाती हूँ।
    जताती नहीं पर ,
    अंदर से टूट जाती हूँ ।
    कभी कभी झूठ बोलती,
    पर हमेशा बहुत पछताती हूँ।
    हर चीज़ से लड़ जाउँ
    तेरे आसुओं से घबराती हूँ।
    दुनिया कुछ नहीं,
    बस तेरी हँसी चाहती हूँ।
    जितनी बड़ी हो जाउँ, चाहें जहाँ जाउँगी,
    लौट कर,
    हमेशा,
    बचपन की तरह , तुझसे चिपट कर,
    हर दर्द भूल जाउँगी।
    तू साथ मत छोड़ना ।
    तेरे सपने पूरे,
    मै करके दिखाउँगी।

    ©deepshikhagoswami