• i_am_shivam 12w

    सैलाब-ए-वफ़ात न रोक पायेगा मुझे
    मानता हूँ ख़ाक ये कर जायेगा मुझे

    नूर-व-सुब्ह न मिरे घर के रो़जन में
    अंजान वाकिआ बना जायेगा मुझे

    बैठे हुए ना-तव़ानो की महफ़िल में
    मौज-ए-मय में बहा ले जायेगा मुझे

    मेरी आबरू सियाह है तेरी निगह में
    अश्कों में अगवा कर ले जायेगा मुझे

    हम देखते है बज़्म-ए-हस्ती में शिवम
    तमाशा-ए-अत्फाल बना जायेगा मुझे

    -: Shivam Upadhyay