• nehulatagarg 7w

    और दुनिया के आम इंसान सियासी मामलों में कभी दखल नहीं देते ना ही उनसे किसी के तख्तों - ताज , किसी की सल्तनत को कोई खतरा होता है । एक शाह अपनी सल्तनत की हिफाजत के लिये तो कभी अपनी सल्तनत को आगे बढाने के लिये जंग लडता है लेकिन फिर भी अवाम को तकलीफ पहुंचाने की कोशिश जरूर करता है तो कभी उनका कत्लेंआम । जिन लोगों को ब्राथैसियन ने मौत की नींद सुलाया वो वो मासूम लोग थे जिन्होंने तो आवाज तक नहीं खोली थी उनके खिलाफ और वो भी यही सोचकर बैठे थे की , हमें तो बस जिंदा रहना है लेकिन उन्हें फिर भी मार दिया गया और हर रोज यही सब होता है रोम में और हमने क्या कहा था ? की , घर के बाहर आग लगी हो तो यह नहीं सोचना चाहिये की , हम तो अन्दर कमरों मे महफूज है क्योंकि आग तो फैलेगी ही । क्रैथैसियन कहने लगते है अनमने से - ठीक है गर आप यहीं चाहती है तो यही सही । हम अपने वालिद के खिलाफ शमशीर उठाने के लिये तैयार है और बगावत का झंडा बहुत जल्द हमारे हाथों में होगा बस थोड़ा सा वक्त दे दीजिये हमें तो आहन्ना कहने लगती है - यह सही है शहजादें सलामत के आप हमें यह अफसोस जतायें की , हमने आपके साथ जबरदस्ती की तो आपको यह सब करना पडा जबकि आप जानते है और हम आपको पहले भी कह चुके है की , हम उस राह पर कभी नहीं चलते जिस पर हम चलने को तैयार ना हो और उस काम को कभी हाथ नहीं लगाते जिसमें हमें यकीन ना हो तो बेहतर यही है की , आप अपनी जिंदगी जियें और हम अपनी जिंदगी और जहाँ तक आपका यह वहम पाल लेना है की , हम आपसे इसलिए दूर हुए क्योंकि आप शाह नहीं बनना चाहते तो आपको बता दें हम की , आप शाह होते तो भी हमें मलिका बनने की चाहत तब भी नहीं होती क्योंकि आप ही की तरह हम भी सियासत से दूर एक सुकून की सादगी भरी जिंदगी जीने की ही ख्वाहिश रखते है लेकिन क्या करें ? इसे दुनिया का दस्तूर कहिये या खुदा का निजाम की , इंसान के

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    चित्रांगना

    के ख्यालों की दुनिया बसने से पहले ही उजाड दी जाती है और उनके ख्वाब कभी पूरे नहीं होते और वो उस जिंदगी को जीते है जो उनकी अपनी कभी होती ही नहीं । दुनिया का रिश्ता कोई सा भी हो उसमें मोहब्बत के साथ यकीन और आपसी समझ का होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है और जिन रिश्तों में यह खूबी होती है वो दुनिया की बडी से बडी ताकत से भी उन्हें झुकाया नहीं जा सकता और हमने कहा था ना की , घर को बाहर की आग नहीं अन्दर की चिंगारी जलाती है तो अब आप समझ गये होंगे की , हम क्या कहना चाहते है ? रूखसार अबु को खेमें में आकर बताने लगती है -