• soullove 14w

    लुट चुकी है जो अस्मत उनकी
    तो वापस कौन दिलाएगा

    अब न वो निर्भया है ज़िंदा
    न आशिफ़ा को अब तू पाएगा

    बस बात यहाँ पे फ़िर होगी
    फ़िर झंडा कोई उठाएगा

    हत्यारों का बिगड़ेगा न कुछ
    फ़िर नंगा सच हो जाएगा

    इस राजनीति की आंधी की
    क़ीमत ये देश चुकाएगा

    जो तार-तार करते ईज्जत
    उन्हें कब्र में कौन सुलाएगा