• nehachande 5w

    Inspired by Niraj Nidan from The Social House!
    कब कहा मैनें की इकरार करो;
    पर युं ही ना इन्कार करो,
    हाल-ए-दिल भी बतलाऊंगी;
    कभी तो हमसे आ के बात करो |

    बहुत सी अनकही बातें हैं,
    साथ में जगी हुई रातें हैं,
    कुछ मासूम से वादे हैं और ;
    रूठने-मनाने की यादें हैं,
    इन सब बातों का जिक्र होगा ;
    बस तुम हमसे एक मुलाकात करो |

    जानती हूँ कि 'मैं' नहीं हूं मंजिल तेरी;
    पर कुछ दूर तक तो सफर में साथ चलो |
    सुना है, बांटने से प्यार बढ़ता है,
    तो क्यों न वक्त बांटने का इंतजाम करो |
    कब मैनें कहा कि इकरार करो,
    पर युं ही ना इन्कार करो |

    कुछ मेरी सुनो, कुछ अपनी सुनाओ,
    लफ्जो के खत्म होने तक तो बात करो |
    अच्छा छोड़ो, तुम मत कहना कुछ पर;
    सुन सुन के थक जाओ तब तक तो इन्तजार करो |
    कब मैनें कहा की इकरार करो,
    पर युं ही ना इन्कार करो |

    छू लिया तुने तो मुझे बिन छूए ही,
    काश 'तुम' आंखें मिल जाने का ख़याल करो |

    चलो नहीं कहती मैं की इजहार करो,
    पर युं ही ना इन्कार करो |
    हाल-ए-दिल मैनें तो बता दिया,
    पर तुम अब खुदसे तो इकरार करो ||
    -नेह!
    ©nehachande