• yashsharma 15w

    सुबह सुबह का ये तेज़ बारिश का मौसम,
    बचपन में अच्छा लगता था क्योंकि स्कूल नहीं जाना होता था, पर अब खलता है।

    सुबह सुबह की ये ठंडी हवाएं,
    बचपन में अच्छी लगती थी क्योंकि माँ रज़ाई ओढा देती थी, पर अब खलता है।

    खाली हाथ खाने का डब्बा लिए निकल जाना,
    बचपन में अच्छा लगता था क्योंकि उस दिन कैंटीन में खाते थे, पर अब खलता है।

    किसी दिन देर हो जाए तो डर नहीं होता था,
    पता था पापा छोड़ आएंगे, पर अब खलता है।

    कपड़े हमे तैयार मिलते थे, और बगल में रुमाल भी होता था,
    अब कपड़े तो होते है, पर रुमाल का नहीं मिलना खलता है।

    बचपन में बड़े होने का बहुत शौक था,
    अब जब बचपन पीछे छूट गया, तो बड़ा होना खलता है।

    ©yashsharma