• mrigtrishna 13w

    अच्छा हुआ जो हम इंसान नहीं बने,
    झूठी शान शौकत की दुकां नहीं बने,
    ख़ुदा सा नक़ाब ओढ़े शैतान नहीं बने,
    अच्छा हुआ जो हम, इंसान नहीं बने।
    इंसानियत की झूठी पहचान नहीं बने,
    धड़कते हुए से बेजां सामान नहीं बने,
    अच्छा हुआ जो हम, इंसान नहीं बने।
    दरख्वास्त ही रह गए फ़रमान नहीं बने,
    कच्चा सा घर रहे, हम मकान नहीं बने,
    अच्छा हुआ जो हम, इंसान नहीं बने।
    वो जानवर अच्छे जो भगवान नहीं बने।
    ©mrigtrishna