• bhargava_prem 15w

    नज़ाकत

    सफीने में छिपा कर के, तेरी इक मुस्कुराहट को।
    अमां हम भी, कभी यूँ मुस्कुराना सीख ही लेंगे।।

    बशर ये, कर नहीं पाया मुकम्मल; चाह को तो फिर
    मियां, हम जीत कर भी मात खाना सीख ही लेंगे। ।




    ©bhargava_prem