• i_ujala0975 16w

    #तुम #मैं

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    मैं और तुम।

    देखो! यहां मैं भी हूं, तुम भी हो।
    रात के नज़ारे भी हैं, जगमगाते सितारे भी हैं।
    हवाओं से बदलते अरमान भी हैं, सपनों का एक मुठ्ठी आसमान भी है।
    उसकी नवाजी मुस्कान भी है, कहीं टूटता जहान भी है।
    गमों का दरबार भी है, ये ज़िन्दगी गुलज़ार भी है।
    देखो! यहां मैं भी हूं, तुम भी हो।
    सेहर का रंग भी है, नई उमंग भी है।
    राह में धूप की तपिश भी है, ठंडी छांव की कशिश भी है।
    दिल को उनकी खवाहिश भी है, दर्द-ए-इश्क़ की नुमाइश भी है।
    कुबूल दुआ होने का इंतज़ार भी है, इस पतझड़ में अजब सी बहार भी है।
    देखो यहां मैं भी हूं, तुम भी हो।
    हां तन्हाई भी है, रुसवाई भी है।
    मैं तेरी चाहत भी हूं, हां तेरी राहत भी हूं।
    तू मेरी इबादत भी है, हां मेरी आदत भी है।
    ये इश्क़ सुकून भी है, हर लम्हा बढ़ता जुनून भी है।
    देखो! यहां मैं भी हूं, तुम भी हो।

    - उजाला।