• jassarora 16w

    फूल जो बंद हैं किताबों में,
    अब मुर्झा से गए..
    हवायें चली थीं मोहोब्बत की कभी,
    अब रुकी हवयों में जीने लगे..
    इकरार था जिसकी मुस्कान में,
    अब इंकार करती हैं उसकी नज़रें..
    मोहोब्बत करना एक गुनाह था,
    यह उसने बयान किया..
    तन्हाई सज़ा में मिली,
    ये लकीरों में लिख दिया..!


    ©meri.shayri