• writtersnation 5w

    “जो भी ज्यादा या कम समझतें हैं ,
    तुम को बस एक हम समझतें हैं !
    हम ठहाकों का दर्द जीतें हैं ,
    लोग आँसूं को गम समझतें हैं !
    इसलिए बिस्तरा नहीं करते ,
    ख़्वाब आँखों को नम समझतें हैं !
    जो ना समझा तमाम उम्र हमें ,
    हम उसे दम-ब-दम समझतें हैं..!”