• anshithewriter 3w

    # December night��
    31/12/17

    "Here is a beautiful poetry having a true feeling about... a girl who has lost his love..!
    This poetry is about how it feels when one loses his/her beloved ones..!!
    "He is no longer with her, but she feels and even enjoy each and every moment she spent with her love, specially in the winter days"... December��
    Remembering those days... somewhere she is happy by cherishing those beautiful moments...but the truth is that she is alone inside.....! Completely lost in his love"...❤️❤️❤️

    #hks #akp

    @hindikavyasangam
    @hindiwriters
    @kavyodaya
    @scribbler_sampada
    @sammie_d75
    @shekhars_poemsircle
    @heeranshimishra
    @manish_mishra
    @saifali2422
    @omi_jain
    @baanee
    @ro_hit
    @mushaaiir
    @yadav_anju_
    @laughing_soul
    @__fantasyinvader__
    @uncaptivated_
    @monikakapur
    @_craziest_soul
    @nniyanayan
    @aashiyana_
    @disha_
    @cold_akhil
    @dreamlifeayushi
    @deepocean
    @dreamlifearshita
    @mess_sentiments_
    @arshaa
    @readwriteunite
    @writersnetwork
    @mirakeeworld

    Read More

    दिसम्बर की रात

    ❤️
    सर्द हवाएँ, मचलती शाम,
    उफ्फ ये उसके चेहरे की हँसी
    उस पर ये क़त्ल-ए-आम,
    दिसम्बर की रात..
    नीले गगन के तले,
    तारों भरी छाँव के साथ
    हाथों में लिए उसका हाथ
    हमें आज भी याद है वो दिसम्बर की रात..
    उसका वो धीरे से पास आना,
    चुपके से कानों में फुसफुसाना
    और मेरा शरमा कर उसकी,
    बाहों में सिमट जाना
    हमें आज भी याद है वो दिसम्बर की रात..
    डर था कहीं खो न जाए,
    कभी वो मुझसे रूठ न जाए
    बड़े ही प्यार से उसका मेरे,
    काँधे पे सर झुकाना,
    देख कर उसको मेरा नज़रे चुराना
    हमें आज भी याद है वो दिसम्बर की रात..
    उसका वो बाहों में भरकर,
    सीने से लिपट जाना
    बड़े ही अदब से बालों को,
    चेहरे से कानों के पीछे ले जाना
    हमें आज भी याद है,
    है वो दिसम्बर की रात..
    उसकी आँखों में मेरा कुछ देर ठहर जाना
    उसकी साँसों की गरमी से,
    मेरा यूँ पिघल जाना..
    हमें आज भी याद है वो दिसम्बर की रात..
    वो भूल गया शायद,
    मैं उसको याद नहीं शायद
    हर दफ़ा वो मुझे, निहारा करता था
    मुझे धड़कन में अपनी, उतारा करता था..
    हमें आज भी याद है,
    वो दिसम्बर की रात..
    उसका छूते ही मुझे फिर से बहक जाना
    खिल कर फूलों सा फिर से महक जाना
    हमें आज भी याद है,
    वो दिसम्बर की रात..
    न उसका साथ है अब न वो रात है अब,
    न प्यार भरी वो बात है अब
    न ही इश्क़ की बरसात है अब..
    न रही वो सुहानी, दिसम्बर की रात..
    हमें आज भी याद है,
    वो दिसम्बर की रात..
    कितना हसीन था वो पल,
    थी हाथों में मेरे, ये पूरी क़ायनात..
    हमें आज भी याद है, वो दिसम्बर की रात..!
    ©anshithewriter