• priyanshu93 14w

    चार पहर जिंदगी के यूँ गुजरे हैं
    हर पहर से 1 दर्द भरी याद लेकर के हम गुजरे हैं

    पहले पहर बचपन मैं दिल की बात बयां न कर सके
    दूजे पहर बयां किया इश्क़ अपना किसी को तो साथ वो हमारा किसी की खातिर दे न सके
    तीजे पहर न उम्मिदि के सफ़र मैं दिल को अहसास ऐ मोहब्बत उसके जुड़ा होने पर हुईं
    चौथे पहर जब जब सब साथ था वो मेरे पास और हाथों मैं उसका हाथ था
    बनकर के दुनिया मेरी पूरी _ बस इतना कहकर चल दिए जिंदगी से मेरी हम उम्मीद थी हमारे साथ का बस यही अब आखरी पहर था

    ©priyanshu93