• raahi_roshan 5w

    तेरे ख़यालो का एक पल
    देखो दर दर भटक रहा है

    ईक घड़ी तुझसे मिलने को
    हाँ ईक घड़ी तुझसे मिलने को
    न जाने कब से तड़प रहा है
    तेरे ख़यालो का एक पल
    देखो दर दर भटक रहा है

    तुम जो आये थे तो लगा था
    जैसे कोई लम्हा भूला सा
    आ गया हो लौट के फिर से
    दिल में कहीं वो धड़क रहा है
    तेरे ख़यालो का एक पल
    देखो दर दर भटक रहा है

    होश में आते भी तो कैसे
    हम होश में आते भी तो कैसे
    तुमने छू जो लिया था हमको
    उस छुअन की बात ना पूछो
    रोआं रोआं महक रहा है
    तेरे ख़यालो का एक पल
    देखो दर दर भटक रहा है

    तुमसे मिलकर हीं जाना है
    हाँ तुमसे मिलकर हीं तो जाना है
    क्या होता है सुकून ये दिल का
    तेरे मिल जाने की खुशी से
    मन मेरा अब बहक रहा है
    तेरे ख़यालो का एक पल
    देखो दर दर भटक रहा है ।।।

    ©raahi_roshan