• akshatprajapati_8 15w

    बचपन

    अब मैं वापस लौटना चाहता हूँ,
    अब मैं बस वही पुरानी मासूमियत चाहता हूँ।
    युही उड़ती तितलियों को देख कर
    खुश होने वाली मासूमियत चाहता हूँ

    अब मै वही वापस लौटना चाहता हूँ
    जहा मुझे डर अंधेरे से लगता था रोशनी से नही,
    क्योंकि ये रोशनी लोगो के असली चेहरे दिखा देती हैं।

    अब मैं वापस लौटना चाहता हूँ,
    अब मैं वापस उन्ही गलियो में बेफिक्र से बचपन लिए खेलना चाहता हूँ
    उस गेंद को बड़ा खजाना मानकर खुश होने वाली नादानी वापस चाहता हूँ।

    अब मैं वापस लौटना चाहता हूँ
    अब मैं वही वापस लौटना चाहता हूँ जहॉ प्यार का मतलब सिर्फ प्यार ही होता था,
    प्यार की शक्ल मे जिस्म की आरज़ू या टूटे दिलो में बेहिसाब दर्द, नही होता था।।

    हाँ अब मैं वापस बचपन चाहता हूँ,
    अब मैं वापस लौटना चाहता हूँ।।..।।
    ©akshatprajapati_8