• deshraj_shrimahaveerji 5w

    तेरे चहरे को याद कर अब भी रो लेता हूँ मै,
    इस ज़िन्दगी में तू होती....तो और बात थी!

    हँसते-हँसते हर गम पी ता रहता हूँ मैं,
    कुछ गम तू बाँटती....तो और बात थी!

    ये खुदगर्जी के रिश्ते और ये मौसमी फ़रिश्ते..
    ...सब दुश्मन बन चले है मेरे,
    अब तू हाथ देती....तो और बात थी!

    ख़ामोशी से सब-कुछ सह रहा हूँ मै,
    ए ज़िन्दगी तू ना ही होती....तो और बात थी!!

    ✍देशराज श्री महावीरजी
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