• nehulatagarg 14w

    नानी बताने लगती है की , गौतमी से एक रात वाईचुंग ने कहा की , उन्हें समझ आ गया है की , उन्हें जीवन में क्या करना है और क्या बनना है ? अब वो जान गये है की , बिना किसी परिश्रम , शिक्षा और सामर्थ्य के भी बैठे - बैठे ना सिर्फ़ धन , वैभव , ऐश्वर्य और सुख सम्पन्नता की प्राप्ती कर सकते है और सम्मानित सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति कहला सकते है क्योंकि अब उन्हें पता चल गया है की , ज्योतिषविद्या का व्यवसाय ही एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें आप बिना कोई शिक्षा ग्रहण किये भी शिक्षित और बिना कोई ज्ञानार्जन के विद्वान कहलाते हो और अतिमूर्ख होने के पश्चात भी बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति कहलाते हो और बिना किसी परिश्रम के भी पद और सुख - सुविधाओं को भोगते हो और बिना कुछ जानें भी सर्वज्ञानी कहलाते हो और बिना कुछ किये भी सम्मानित व्यक्ति बन जाते हो और भोजन , वस्त्र , धन - धान्य , अन्न के भंडार जमीन आवास और भी बहुत सारी कामनाओं की पूर्ति बिना कुछ कहें ही संसार आगे होकर पूर्ति कर देता है आपकी और आपको देश - विदेश में भ्रमण और सबके घरों में आतिथ्य सत्कार और भेंट मिल जाती है और सब आपके कहें हुए शब्दों पर अंधविश्वास तो करते ही है और साथ ही अपने सम्पूर्ण जीवन और अपने हर एक व्यक्तिगत निर्णय को भी उन्हीं के हाथों में सौंप देते है एक तरह से उनके स्वामी बन जाते है और सम्पदा और सम्पत्ति भी ऐसे ही बना लेती है अपनी । ज्योतिषियों को भोजन वस्त्र , धन धान्य के भंडारों की कोई भी कमी नहीं होती और लोग बिन मांगे ही उन्हें अपना सबकुछ दे देते है और धनपति बन जाते है । हमने भी सोच लिया है की , हम भी ज्योतिषज्ञ ही बनेंगे ताकि हम भी बिना कोई परिश्रम किये सबकुछ अर्जित तो कर ही लेंगे साथ ही अंगना वैभव और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन भी प्रदान करेंगे और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई भी कमी नहीं होगी जीवन में और हम सदा उन्हें प्रसन्न रखेंगे तो गौतमी ने कहा - अच्छा तो यह सुझाव आपको अंगना ने दिया होगा तो वामा

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    चित्रांगना

    यह सुनकर कहने लगती है - अच्छा तो आप दोनों ने अभी से ही एक - दूसरे को चुन लिया है और विवाह करने का निर्णय भी ले लिया और वो भी इतनी कम आयु में । आप दोनों को अभी से ही इतनी शीघ्रता है विवाह करने की और एक - दूसरे को जीवनसाथी भी मान लिया आप दोनों ने और हम सबको तो इस बात की खबर ही नहीं । हम लोग तो जब आपकी आयु में थे तो जानते भी नहीं थे की , विवाह क्या होता है ? और ना ही हम लोगों को पता होता था की , विवाह नामक भी कोई सम्बंध होता है तो अंगना मायूसी से कहने लगती है - इसमें हमारा क्या दोष ? आपने ही तो हमें कहा था की , हमें भी विवाह करना होगा और आप ही की तरह अापसे दूर जाना होगा तो फिर हम क्या करते ? परन्तु नानी माँ क्या विवाह करना अतिआवश्यक होता है और विवाह के बिना व्यक्ति का क्यों कोई जीवन नहीं हो सकता ? वो बिना विवाह किये इस संसार में अकेले क्यों नहीं रह सकता ? आपने कहा था ना की , एक व्यक्ति जो कार्य करें वो जरूरी तो नहीं की , दूसरे भी उसी कार्य को करें तो फिर हम विवाह ना करें तो क्या ऐसा हो नहीं सकता तो सब हँसने लग जाते है । वामा अंगना गले लगाकर कहने लगती है , जब यह संसार बना तो मनुष्य अकेले ही इस संसार में विचरण करते रहते थे और उनका ना ही कोई स्थायी आवास था और ना ही कोई परिवार । प्रकृति की चुनौतीयों से अकेले ही निपटते रहते थे सब लेकिन फिर धीरे - धीरे सब एक - दूसरे के सम्पर्क में आयें और एक - दूसरे के मित्र बनें और सबने अपनी एक संस्कृति और सभ्यता को बनाया और सबने फिर एक - दूसरे के साथ सम्बंधों को और उसी में से विवाह सम्बंध की अवधारणा भी मनुष्य में जन्मी और इसीलिये तब से ही विवाह संस्था का निर्माण हुआ तो अंगना कहने लगती है , अगर ऐसा है तो फिर सब विवाह ही क्यों नहीं करते और सम्बंध क्यों जोडते है तो वामा कहने लगती है , वो इसीलिये क्योंकि हर एक सम्बंध की अपनी एक विशेषता होती है और वही उस सम्बंध को अलग ही रूप प्रदान करती है । आप अभी बहुत छोटी है इसलिए आप यह अभी समझेंगी लेकिन जब बडी हो जायेंगी तो आप सब समझ जायेंगी ।