• pranavapraanjal 33w

    दरिया की भी चाहत होगी ,
    नदी के भाँति मिलने कि कहीं
    पर वो परहेज़ रखता होगा
    सपनों का उसे हक है ही नहीं

    कुछ अंग हवाए उड़ा ले जाती जब
    खूब शैर करता होकर आसमान में मस्त
    कितने सपने बुन लेता एक पल में
    समझ न जाने कहाँ जाती उस वक़्त

    बारिस से मिल कर फिर वो
    धरती पर आता है,
    फिर ताल से नदी ,
    नदी से वापिस घर को जाता है

    सारी ख्वाहिशें नमकीन से लगने लगतें हैं
    अपराध उसे अपने सपने लगते हैं
    फिर किसी दिन हवाएं छेड़ती होगी उसे
    वो ताल में ,नदी में जाने को बोलती होगी उसे

    पर वो सीधा अपने घर को जाता होगा
    सपनों को हर बार वो समझता होगा!!
    -प्रणव!!