• sumit_astor 6w

    "ग़ज़ल"

    इश्क़ शौक़ ने तबाह कर दिया
    ये क्या क्यूँ कैसा गुनाह कर दिया

    उसकी आरजू थी दर्द जानने की
    दिल पे हाथ रख आह कर दिया

    उसे डर था मैं मंज़िल ढूँढ लूंगा
    इस लिए उसने गुमराह कर दिया

    उसने कुछ देर क़ैद रखा बाहों में
    फिर एक दम से रिहा कर दिया

    मैंने उस से मोहब्बत करनी चाही
    और उसने बे-तर्क मना कर दिया

    मुझे नींद नहीं आ रही थी प्यारे
    बत्ती बुझाई और अँधेरा कर दिया

    ©सुमित