• im_gautamsunshine 6w

    मोहब्बत :-

    कि इतनी गहरी मोहब्बत थी तुझसे
    पर खबर तुम तक ये नहीं आ सकी..
    चुपके चुपके तुझे देखता ही गया,
    पर तेरी नजरें हम तक नहीं आ सकी..

    दिल के ज़ख्मों को तुने जो तन्हा किया
    रह कैसे पाती हो खुश मेरे बिन पिया..
    आंखें नम थीं मेरी तुम मुस्कुराती रही
    मेरे टूटे से दिल में ये दर्द समाती रही..

    दिल में रख लूंगा ऐसे संभलकर तुझे
    फासले फाँसलों से भी डर जाएगा...
    तेरे खातिर तो सबकुछ भूला मैं दिया
    बस तेरे नामों का घर जुबां पर किया...

    मेरे सपनों में दिन रात आती तुम प्रिय
    अपने सपनों में भी आने दो तुम प्रिय ।

    - गौतम मिश्रा
    ©im_gautamsunshine