• satyamkotiyal 14w

    यादें

    जो लफ्ज़ ख़्वाब करते थे, वो तिज़ारत आज भी है ,
    जो तस्वीर में कल थे हम, वो हकीकत आज भी है ।
    क्या हुआ जो इश्क-ए-नूर हमारा न हुआ ,
    उसके आने से जो लहज़े में आई थी मेरे, वो कमसिन नज़ाकत आज भी है ।।
    ©satyamkotiyal