• gatisheel_sadhak_bihari 5w

    मेरा देश

    मुझे देश से मोहब्बत है.................क्योंकि उसी में बसता खुद की मेरी शोहरत है,
    मुझे सरकार से नफरत है क्योंकि उसी में रहते मक्कार,,लूटना जिनकी फ़ितरत है!

    मुझे अमन से बड़ी चाहत है................क्योंकि मुझे मेरे बच्चों की बड़ी जरूरत है,
    मेरे लिये जुलूस एक मानो आफत है, क्योंकि उसे होता उन्मादी रंग की जरूरत है!

    मेरा देश प्रेम गर कोई बेईमान मापे....इससे भला क्या दिखेगी मेरी असली सूरत है,
    मैं गुमनाम ही रहूं गुमान में.................कम से कम खुदा को तो मुझसे मोहब्बत है!

    तेरी कुर्सी ऊंची ही सही................तेरी तिजोरी भरी ही सही, तो क्या हुआ रे मूर्ख,
    मेरे पास कुछ नहीं पर इरादे जीने के खुद से पाला...............एक अमिट चाहत है!

    आवाज उठाना ही हमारी इकलौती पूंजी है..........बाकी तो उन्हीं के पास कुंजी है,
    कोर्ट में बड़े नेताओं के बरसों से पड़े लंबित मामले...........क्या अजीब इबादत है!

    चाहतें हजार हैं, राहें बीमार हैं...............सपने हम पर हँसते कहते हम लाचार हैं,
    पूछो जरा सरकार से के क्या उनके घर में भी पैसों के कारण आयी कोई आफ़त है!

    "साधक" बोलने से कुछ नहीं होता,जब तक तुझमें खुद के लिए नहीं असीम प्यार है,
    कोई खबर नहीं लेता......तभी जन जन के मन आज के दौर में बेहद आहत है!


    ©gatisheel_sadhak_bihari